बरसता तू नहीं…..

हूँ शायद मैं तुझसे लापता,
या तू ही है दूर मुझसे,
बरसता तू भी यहीं है,
भीगता मैं नहीं हूँ फ़िर भी…….

आशिक़

आशिक़ों का कहाँ होता है कोई दिन,

मज़हब या होता ही कोई नाम,

आशिक़ों की तो है उम्र,

जब तक है यह समा,

ये ज़मीन ओ आसमाँ,

मरके भी जो क़ायम है,

ना मरके भी जो ज़िंदा है,

है खुदा भी जो,

है ग़ुलाम भी कभी,

गिरता भी जो है,

संभलता भी है कभी,

उजाड़ता जो बस्तियाँ भी है,

सुकून से सुलाता भी है,

है शायद तू भी,

या शायद हूँ में भी,

आशिक़ों का कहाँ होता है कोई दिन,

आशिक़ी ही होगी शायद,

जिससे हूँ में, हो तुम भी,

आशिक़ों के नाम हो हर सदी

हर सदी……

नशा

कुछ अलग नशा सा है आँखों में उसकी,

मैं दूर जाता तो हूँ पर भी नही,

कोशिश कई बार की थी,

शब्दों में उतारूँ सीरत उसकी,

रात हुई,

हुई भोर भी अभी,

पर शायद क़ायम है बेपनाह उसका,

नशा इस मुलाज़िम पर आज अभी…..

रूह

धूँदता रहा था मैं कई चौखटों तुझे,

ना मिला भी तू,

शायद मिला भी मुझे,

लिखता तो मैं फिर भी था,

अल्फ़ाज़ों में रूह पर उतरी है आज तुझसे…..।।।।।

Do you have a minute?

I have eyes to see,

Feet to run,

Hands to carve my own sun,

And I see not the seen,

The do, not done,

Life isn’t fair to us all,

The Sun is harsh on some of our own,

What will happen if you a spare minute,

Stop, look around and be empathetic,

An act of kindness is a ripple they say,

Dominos fall and create a chain,

And traverses space, time and of all known gears,

Maybe your hand was their last despair,

A day known,

A memory sown,

And hope begins to grow,

A failed marriage, a jobless spirit,

Or maybe the one who had lost all his tidings,

Stretch a hand or that gorgeous smile,

Lend an ear or send a word,

Sometimes thats what all it takes,

Life isn’t easy for us all,

Hope we all could make it someday,

But Whatever happens always remember,

One for all,

All for one…..

इंसान

इंसान नही वो कायर है,

अहंकार से भरा हुआ,

बेइमानी में धसा हुआ,

झूठ की बुनियाद पे जिसका,

हो साम्राज्य टिका हुआ,

जात, बिरादरी या भगवान हूँ अल्लाह,

हो कारोबार जिसका सधा,

इंसान नही वो कायर है,

शर्मसार जिससे ये आयत है,

छीन कर गुड्डे गुड्डियाँ जिसने थमाईं,

असला, बारूद, भीख का कटोरा,

बंद दरवाज़ों में दफ़्न किए,

कई सपने बेपनाह,

इंसान नही वो कायर है,

देवी कह कर पूजता वोहि है,

लक्ष्मी भी तो वोहि है,

फिर क्यूँ नही सोचता है,

अबला भी तो एक प्राणी है,

जन्म भी जिसका नग्वारा है,

पल्लू ही जिसका आँगन है,

तेज़ाब ने भी उसका ना जाने क्या क्या बिगाड़ा है,

इंसान नही वो कायर है,

हवाओं का भी आज चिरहरण हुआ है,

भुखमरी, अकाल, विनाश का धुआँ है,

इंसान ही इंसान का दुश्मन बना है,

सीमाओं पे ही हर वक्त पहरा है,

हूँ मैं भी, शायद हो तुम भी,

हो ख़ौफ़ जहां, वहाँ होगा और क्या भी,

कोशिश आज चलो मिलके करें सभी,

बूँद बूँद कर सागर भरे ही तो भी,

ऊँच नीच, क्या तेरा मेरा,

हो सारा संसार अपना रैन बसेरा,

होगी शायद आज भी कहीं इंसानियत छुपी हुई,

होगी शायद आज भी कहीं करुणा छुपी हुई,

ख़ौफ़ को आज जीतने नही देंगे,

तुम भी हो, मैं भी हूँ, हम सब भी हैं,

आज बहादुर सभी,

इंसान का इंसान से प्यार,

हो मंत्र सबका यही….

Why make it so complex?

Why make it so complex,

The winds from the east,

The water from the north,

The migrant birds,

The distant clouds,

Rule of life it always has been,

Diversity is the only beauty evergreen,

No one choses the way they are,

No one selects the place to be born,

Fate they say decide your place,

Your Karma they say decides your place,

Isn’t life beautiful in all its ways,

Why make it so complex,

Caste, religion, creed or sex,

Black or white or coloured or trans,

Slow, fast, exceptional or sans,

Will it matter when you are underground,

I pray to the lord, my work, the seen,

Do I become strong or weak,

My hands give me the food to eat,

The house to build, the clothes to wear,

The mind clears the way,

The heart opens my door,

Isn’t life beautiful in all its ways,

I respect the face of kindness,

Of compassion and empathy,

I respect the differences,

They all make us unique,

My lord can be whoever I wish to be,

The mind, the holy or the unseen,

For I respect life,

This life and all the lives,

The purpose of a life would be achieved,

For the day would be the greatest,

Lives would be treated as living,

No semblance of caste, race, sex or religion,

The strong carry the weak,

The major guard the numbered,

No closet, No need to hide,

The lungs breathe the freshest of airs,

Concrete jungles painted green,

Winds flow over continents,

The rivers caress the golden plains,

The clouds mist over the living,

And we become what has always been,

Beings that nurture, protect and help to grow,

Why make it so complex,

Isn’t life beautiful in all its ways …..