कहां नहीं।।।।। 

बड़ी मुद्दत्तों से आज देखा रूप तेरा,
ढूँढता फिरता था ना जाने कहाँ कहाँ,
एक बच्चा, एक अधेढ़, था खड़ा चार पैरों पे जो,
मुस्कुराकर मिला था कहीं भागता हुआ,
मौसम भी आज ओढ़े तेरा तराशा हुआ वो मलमल का कुर्ता,
पूछा उससे मैंने कहाँ है तू ऐ महामहीम,
आवाज़ आयी तब हर ज़र्रे से,
कहाँ नहीं।।।।।।

Once again English won’t do justice but here it goes….  I hope all of you like it. 🙂

Saw your beauty after ages,
I was searching in things And places,
A kid, an aged, standing on feet of four,
Running somewhere I met him smiling the weather,  
Wearing that silky robe that you had weaved,
I asked him where are you O mighty,
A sound came from every atom,
Where not…..