ज़िंदा ना गाड़ो…. 

ऐसे मेहफिल में तो ना गिराया करो ए दोस्‍त हमें,
माना आप जितने ना बन पाए हैं अभी,
थोड़ी किस्मत बेवफा थी,
और शायद वक़्त खराब था,
कोशिश कोन नहीं करता जनाब,
की सवर जाए उसका भी नसीब,
ठुकराए हुए दुनिया से जब आतें हैं हम कभी दर पर तेरे,
ऐसे ना छलनी किया करो हमें,
शायद कभी पहुंच पाएंगे जहां हैसियत है तेरी,
आज तो ज़िंदा गाड़ो ना हमें…..

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