क्या हो सकता है यह?

मैं बढ़ता हूँ तेरी ओर,
धीरे धीरे फासले यह कम होते हैं,
धड़कता हुया यह दिल मेरा है,
कुछ शर्मा कर तुमसे केहना चाहता है,
हाथ तुम्हारा थाम कर दरिया यह पार करना चाहता है,
और जाना चाहता है उस जहाँ,
आसमान मिलता है इस धरती से जहां,
हो जाते हैं एक दोनों,
किसी जुगनू की तरह,
जो मिल चुका हो अपने मुकाम से,
आहिस्ता आहिस्ता, मद्धम मद्धम……..