रूह

धूँदता रहा था मैं कई चौखटों तुझे,

ना मिला भी तू,

शायद मिला भी मुझे,

लिखता तो मैं फिर भी था,

अल्फ़ाज़ों में रूह पर उतरी है आज तुझसे…..।।।।।