मेरा आसमान….

कुछ दबी दबी सी साँसों में,
खोया है मेरा आसमान,
मधम सी धूप है,
गीली है धरती भी,
इसपे ना जने किस किस के निशान,
मैं कोशिश भी करता हूँ कभी,
कभी सो जाता हूँ थक के,
क्या माँगता है,
तू ही बता दे ऐ खुदा,
धुन्दली सी हो जाती है,
नज़रें ये मेरी भी,
में पलके उठाता भी हूँ,
पर शायद सुबह नहीं हुयी अभी तक,
सो रहा कहीं अपनी ज़ुल्फ़ों को समेटे,
शायद मेरा भी आसमान,
ना जाने क्या क्या सितम झेले होंगे,
जब आया होगा घर लौट के वापिस,
माँ, बाबूजी, भाई, बहन,
क्या दिलासा देता है तेरा भी यह जहां,
पर शायद अब रात है,
या दिन भी,
अब होश धूमिल सा हो रहा,
कुछ दबी दबी सी साँसों में,
खोया है मेरा आसमान…..