इश्क़

इश्क़ है किसी का दरिया,
बहता ही चला है,
है किसी का आशियाँ भी,
घर में रहता है,
किसी को खुदा दिखता भी उसी में है,
और किसी को ये जहाँ भी,
जुदा करके मिलाता भी है,
ना दिखा जो दिखा है,
ना जान के भी जो गवाह है,
है तुझमें भी,
मुझमें भी छुपा है कहीं,
दिखता मुझे भी किसी में है,
शायद तुझे भी किसी में,
है हाथ थाम लेता,
कभी झटक के छोढ़ जाता भी है,
पर इश्क़ नहीं जाता साया छोढ़ के किसी का,
वक्त वक्त की बात है साहब,
आज तू इश्क़ से है,
कल इश्क़ होगा तुझसे ही…..