चाँदनी… 

रोशनी की चादर ओढ़े,
ना जाने कहाँ से निकली आज चाँदनी है,
कुछ मदहोश मैं हूँ,
कुछ ख़ामोश तुम भी हो,
चाँद ने कुछ कहा तुम से है,
शर्मा के तुमने जो बादल बिखरा से दिए हैं,
करवटें मैं बदल रहा हूँ,
और जल्दी ना जाने सूरज को क्यूँ है।

Wearing the robe of light,
Moon has come out from hiding,
I am a little drunk,
Silent you are,
Something the moon has whispered in your ears,
And you have scattered the clouds, a little shy,
I am changing the sides in my bed,
And why is the Sun in such a hurry….