दुआएँ….

कुछ दुआएँ मान भी लेना मेरी,
अभी तो हस्ती बनी ही क्या है……

 

 

 

Answer some prayers of mine,
I am still a nobody……..

अल्ला….

कुछ फुर्सत से बनाई होगी यह निगाह मेरी तूने,
देखता भी मैं तुझे हूँ,
दिखता भी तू नहीं है,
फिर भी जब कहीं सजदा कर लेता हूँ किसी मज़ार पर तेरी,
हवाएं चुपके से केह जाती हैं इन कानो में मेरे,
अल्ला हू अल्ला हू अल्ला हू….

Sajda…. 


सजदा करता हर इंसान कुछ पाने की चाह में झुकता है, 
सर झुकाया जब मैंने तेरी उस मज़ार पर, 
चाहिए नहीं था मुझे कुछ और, 
जैसे पानी मिल गया इस मुसाफिर को, 
सर अब झुकता है सिर्फ तेरे लिए ऐ पाक।।।। 

P. S. – This is a picture of Jama Masjid, Delhi.