The night had lost its senses…..

शाम भी हसीन थी, 
कुछ गहरी कुछ बेबाक थी, 
वो आए थे किसी हवा के झोंके की तरह, 
जाम हमने क्या था पकड़ा, 
शाम शराबी हो गयी….. 


The evening was magnificent, 
A little reserve, a little extravagant, 
She came as a gush of wind, 
I held a glass in my hands, 
And the night had lost its senses…. 

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चाँदनी… 

रोशनी की चादर ओढ़े,
ना जाने कहाँ से निकली आज चाँदनी है,
कुछ मदहोश मैं हूँ,
कुछ ख़ामोश तुम भी हो,
चाँद ने कुछ कहा तुम से है,
शर्मा के तुमने जो बादल बिखरा से दिए हैं,
करवटें मैं बदल रहा हूँ,
और जल्दी ना जाने सूरज को क्यूँ है।

Wearing the robe of light,
Moon has come out from hiding,
I am a little drunk,
Silent you are,
Something the moon has whispered in your ears,
And you have scattered the clouds, a little shy,
I am changing the sides in my bed,
And why is the Sun in such a hurry….

चमकती उस शाम का 

चमकती उस शाम का क्या काफिला था, 
कुछ खुशनसीब हम थे, 
कुछ बेपरवाह आप भी थे, 
तारे मुसाफिर थे, 
रात ज़रिया थी, 
चमकती उस शाम का क्या काफिला था,
जाना शायद कहीं भी नहीं था, 
पीछे देखा तो कहाँ आ पहुंचे थे…… 

Amazing was the parade of the twinkling night, 
I was nothing but lucky, 
You were a little careless, 
Amazing was the parade of the twinkling night,
Headed I was nowhere,
turned back to find,
where I had come…  

Is this the end? 

The following poem are my personal views. I don’t follow any particular school of thought. I apologise in advance if hurt anyone’s sentiment in these words. 
I am sorry. 


खाता है वो साग, वही खाता है मास,
पहनके के वही कुर्ता, जाता है मस्जिद या कृष्ण दरबार,
वो पूजता है एशु को, कभी कोरान को,
बच्चे, बूढ़े, औरत या हो कोई जवान,
चेहरा नहीं होता है उसका,
मज़हब क्या है उसका,
क्या है वो इंसान,
तबाही का सामान लेके, जो निकलते हैं बेख़ोफ,
क्या है वो इंसान,
रखवाले क्या बनते हो ईश्वर के,
क्या बच्चें करते है उसका जीना बेहाल,
फिर भी गिराते हो मस्जिद, मंदिर या कोई गिरजाघर,
क्या थी यही रखवाली, क्या था यही जिहाद,
अल्लाह भी है ख़ौफ़ मैं तेरे,
ज़लज़ले की हो चुकी शुरुआत,
भूख, भरष्टाचारी, ग़रीबी, अराजकता का है कैसा मायाजाल,
लोभियों के कंधों पे सवार होके आएगा एक दिन कोहराम,
आस टूटेगी, होगी ज़िन्दगी नीलाम,
तब शायद समझेगा इंसान,
उस मज़हब का क्या कीज़िएगा,
जब ख़त्म हो जाएगा इंसान।

Once again an English translation for the English readers. I wish you could read this one in Hindi. 

He eats spinach, he eats meat,
Wearing the same cloth, he visits a mosque or a temple,
Worships the the Christ, and sometimes the Quran,
Kids, elderly, women or the youth,
He has no face,
What is his religion.
Is he a man,
With instruments of destruction, he runs amok,
Is he a man,
He protects God,
Do kids ever cause god any harm,
Still he demolishes mosques or churches,
Is this the protection, is this jihad,
Allah fears at his creation,
Apocalypse has just begun,
Hunger, corruption, poverty, anarchy are a great web,
Riding the shoulder of the greedy will come the doom,
Hope will be lost, life will be sold,
Then maybe the man may understand,
What will the religion serve,
When there would be no man…

कहां नहीं।।।।। 

बड़ी मुद्दत्तों से आज देखा रूप तेरा,
ढूँढता फिरता था ना जाने कहाँ कहाँ,
एक बच्चा, एक अधेढ़, था खड़ा चार पैरों पे जो,
मुस्कुराकर मिला था कहीं भागता हुआ,
मौसम भी आज ओढ़े तेरा तराशा हुआ वो मलमल का कुर्ता,
पूछा उससे मैंने कहाँ है तू ऐ महामहीम,
आवाज़ आयी तब हर ज़र्रे से,
कहाँ नहीं।।।।।।

Once again English won’t do justice but here it goes….  I hope all of you like it. 🙂

Saw your beauty after ages,
I was searching in things And places,
A kid, an aged, standing on feet of four,
Running somewhere I met him smiling the weather,  
Wearing that silky robe that you had weaved,
I asked him where are you O mighty,
A sound came from every atom,
Where not…..

मालिक।।

image

ज़र्रा ज़र्रा तेरा ही नाम ले,

इबादत को झुके जो सिर,

हर शक्स उसका नाम ले,

परदे में तो हर इंसान ना जाने क्या कुछ है,

रेहमत पड़े जो तेरी तो हर इंसान खुदा ही है,

बारिश की कुछ बूँदें आज मुझपे भी बरसा ऐ मालिक,

ज़रा देखें तो मुझमें भी क्या है तू मालिक।।।।

Suraj….

ग़ैर बनके मिला ना करो तुम हमसे,
ख़फ़ा हो ज़रूर जुदा ना हो तुम हमसे,
बेकद्री मैं कभी अंजाने में वो गुनाह हुआ था,
गरजते तो बादल भी हैं कभी,
सूरज भी उनसे क्या कभी छुपा होगा।।।।

Gair banke na mila karo tum humse,
Khfa ho zaroor juda na ho tum humse,
Bekadri Main kabhi anjane main voh gunah huya tha,
Garajte toh badal bhi hain kabhi,
Suraj bhi unse kya kabhi chupa hoga…..