राज़ गेहरा….

हर उम्र में छुपा है,
कोई राज़ गेहरा,
शब्दों से कोई,
तो करता है इशारों से बेपरदा,
में निकलता हूँ बाज़ारों से जब भी,
कुछ गुनगुना सी देतीं हैं,
आवाज़ें अनसुनी,
कोई चर्चा,
कोई क़िस्सा,
समेट के रख लेता हूँ उन आवाज़ों को झोले में अपने,
ना जाने किस उम्र में शब्दों का लिबास ओढ़ कर,
ये आ जाएँ ज़ुबान पे मेरी,
या फ़िर ग़ुम हो जाएँ इन सिलवटों पे मेरी,
क्या नहीं छुपा मुझमें भी कोई राज़ गेहरा….?

अल्ला….

कुछ फुर्सत से बनाई होगी यह निगाह मेरी तूने,
देखता भी मैं तुझे हूँ,
दिखता भी तू नहीं है,
फिर भी जब कहीं सजदा कर लेता हूँ किसी मज़ार पर तेरी,
हवाएं चुपके से केह जाती हैं इन कानो में मेरे,
अल्ला हू अल्ला हू अल्ला हू….

Idols….

A pandal being set up for a Satsang. People seek religion when they are frightened. Fear is a musky business.
A Happy World Photography Day to everyone out there. Each one of us is a photographer. Celebrate the photographer in you.