तराज़ू….

वफ़ा की हमारी हमने ना कोई नज़्म दी थी,
ज़माना क्या बैमान हुया था जिस दिन,
अपने तो तराज़ू में इस नाचीज़ को तोल दिया था…

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घाव….

इंतज़ार और शायद है करना पड़ेगा वक़्त को अभी,
कुछ घाव कम्बख्त भरते नहीं…..

Let time wait a little more,

Some wounds are still afresh……….

Pieces of mine….. टुकड़े मेरे…….

कई दर्द छुपा रखे हैं मैंने,
यह जो सिलवटें हैं इस जिस्म पर मेरे,
ज़रा आना कभी फुर्सत से मेरी चौखट पर तुम भी किसी रोज़,
कुछ दफनाने हैं जो बच गए थे वो टुकड़े मेरे……..

No one sees the pain within,
The ones that stay in spaces of me,
Come to me, maybe once in a while,
Some pieces of mine are still left to be buried………

अल्ला….

कुछ फुर्सत से बनाई होगी यह निगाह मेरी तूने,
देखता भी मैं तुझे हूँ,
दिखता भी तू नहीं है,
फिर भी जब कहीं सजदा कर लेता हूँ किसी मज़ार पर तेरी,
हवाएं चुपके से केह जाती हैं इन कानो में मेरे,
अल्ला हू अल्ला हू अल्ला हू….

पारियों की रानी…. 

कभी हस के भी मिला करो,
इतना भी  गुरूर ठीक नहीं,
सताया इतना करो,
जितना बर्दाश्त हो सके,
पत्थर की मूरत अक्सर टूट जाती है,
नेक हो जो इरादे ही सही,
मजबूर ना कीजिए हमें ए पारियों की रानी,
वरना फरिश्ते हम भी नहीं….

आशियाना…. 

कभी आईना देखा,
तो कभी झाँका गेहराइयों मैं,
आसमानों की मुलायम पर्दों मैं देखा,
तो कभी समुन्दर के अनंत मैं,
घर ढूंढ रहा था मैं,
ना जाने कहाँ,
ना जाने कब,
अक्स जो तेरा गिरा था मुझ पर,
वो सर्द किसी रात मैं,
ना जाने कैसे,
ना जाने कब,
इस काफिर को अपना आशियाना मिल गया……