कब्र पर मेरी… 

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अवारा…. 

कुछ बात है बेघर किसी पंछी की,
यूँही नहीं कोई इतना दिलदार होता, 
रस्ते मैं चलते हुए आज जब पुकारा था उस ठुकराए कुत्ते को मैंने, 
घर तक छोड़ कर गया था वो मुझे, 
याद करना कभी, 
कभी मिल भी लेना, 
फिर कभी रस्ते से गुजरते हुए आवाज़ भी देते जाना तुम, 
यूँही नहीं मैं हूँ आवारा, 
मजबूरी है, जा रहा हूँ मैं, 
कहा था किसी रोज़ उसने मुझसे, 
हस के अलविदा करा था मैंने, 
और कहा था जाते हुए, 
आज़ाद हो तुम मुझसे, 
और मैं तुमसे शायद, 
कभी मिल जाना, 
कभी नाम पुकार लेना मेरा, 
आसमान है मेरी छत, 
यह धरती मेरा आशियाना…. 

When I am lost….. In you…. 

Can you please hook this button up? 
I cannot reach it. 
She said while he tied his laces. 
Sure. 
As he came closer to her. 
I wish I could stay like this forever. 
Looking at you and nothing else. 
She pinched him. 
What happened to you. 
Where were you lost. 
Nothing. I was just remembering the way to the venue. 

The night had lost its senses…..

शाम भी हसीन थी, 
कुछ गहरी कुछ बेबाक थी, 
वो आए थे किसी हवा के झोंके की तरह, 
जाम हमने क्या था पकड़ा, 
शाम शराबी हो गयी….. 


The evening was magnificent, 
A little reserve, a little extravagant, 
She came as a gush of wind, 
I held a glass in my hands, 
And the night had lost its senses….