पुराने पिटारे……

कुछ खोले हैं पुराने पिटारे मैंने,
धूल जिन पर बना चुकी थी अपने मकान,
परिंदों सी बनके उड़ी वो बंद हसरतें,
वो यादें, वो कीमती लम्हे,
कुछ खोले हैं पुराने पिटारे मैंने,
वो गर्मी की दोपहरें,
धूप मैं दौड़ते,
वो चोर और सिपाही,
गलियों मैं आवाज़ लगाती,
वो मीठे बुढ़िया के बाल,
कुछ खोले हैं पुराने पिटारे मैंने,
कुछ पिटारों में थे,
वो गुड़िया-गुड्डे,
वो लाल गाड़ी,
वो लंबी रेलगाड़ी,
जिस पर कई बार बैठ,
किया करते थे सफर,
जिसकी सड़कें थी,
कभी दीवारें,
तो कभी थी पापाजी का वो विशाल सीना,
मिला वो पुराना झुनझुना भी उधर ही कहीं,
याद नहीं कब देखा था इसे कहीं,
संभाल के रखी थी एक कोने में,
वो स्कूल की ड्रेस,
कई बार जिसे ज़बर्दस्ती पेहेन,
निकल पड़ते थे स्कूल की ओर,
समय जिसे शायद अभी तक नहीं छू पाया था,
कुछ जादुई था यह पिटारा,
मैं कुछ देर वहीं बैठ गया था,
एक झंझानहट सी दोढ़ गयी थी पूरे जिस्‍म में,
वक़्त शायद गुस्ताख है,
गुज़रता मेरी या तेरी मर्ज़ी से नहीं,
जताता नहीं अपनी मौज़ूदगी,
फिर ऐसे ही किसी दिन,
खामोशी से दस्तक देता है,
मग्न कर देता है कई बार,
रुला भी देता है,
और एक हल्की सी चिंगारी जला जाता है,
उस सीने में मेरे और तुम्हारे,
सेक जिसकी शायद ज़रूरी है,
उस पुरानी रेलगाड़ी की छुक-छुक सुनने के लिए,
और शायद गर्म करने को वो ठंडे पड़े बुढ़िया के बाल,
कुछ खोले हैं पुराने पिटारे मैंने आज……

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You Fall…..

I moved slowly ahead,
The pulsating heart,
Now enjoying the sudden commotion,
I am still behind he shouted,
As I forced my legs to move,
I came a distance,
Only to look behind,
He had gotten rid of the hold,
I fell down,
But that day I had learnt,
Something that would last forever,
Simple it was and sound it is today,
You pedal to move,
And stop to fall,
But then,
You only fall down to pick yourselves up….

 

Yesterday I Saw Her…….

Yesterday I saw her, 
Drenched in the morning drizzle, 
Yesterday I saw her, 
She was thinking, 
Not looking,
Just walking, 
Yesterday I saw her, 
As the tarmac stick to her shoes, 
The shirt that was a bit loose, 
Yesterday I saw her, 
And she walked as the skies turned greyer, 
The clouds growled louder and laid their chest open bare, 
Yesterday I saw her, 
She needed no one, 
Or maybe it was the with her, 
She sailed through the freefall, 
Of the thousand microneers, 
Yesterday I saw her, 
And saw her near, 
The winds had guided our little vessel, 
Onto the lands of the sun, 
The moon and beyond, 
Yesterday I saw her, 
As she walked away, 
Slowly diminishing in the growling rain, 
I sailed a boat in her direction, 
Hoped that it might reach her, 
Boats of paper seldom reach, 
The oceans wide and blue, 
But who could take that from me, 
Yesterday I saw her…….